बवासीर का ऑपरेशन कैसे होता है? लेजर विधि का चयन क्यों करें?

गुदा के भीतर (गुदा नहर) की नसों में सूजन होने को आंतरिक बवासीर कहते हैं और गुदा के आसपास (गुदा नहर के बाहर की नसों में) सूजन को बाहरी बवासीर कहते हैं।

अधिकांश मामलों में शुरूआती स्टेज के बवासीर खुद ही ठीक हो जाते हैं। उच्‍च फाइबर आहार, दिन में 8-10 गिलास पानी का सेवन और डॉक्‍टर की दवा हाल ही में पैदा हुई बवासीर का इलाज कर सकते हैं।

गंभीर बवासीर का उपचार के लिए किसी सर्जरी या प्रक्रिया की आवश्यकता होगी, जो पाइल्स के स्थान और ग्रेड पर निर्भर करेगा।

बवासीर का निदान

आपका डॉक्टर बाहरी बवासीर का निदान केवल उन्हें देखकर और छूकर कर सकता है। यदि आपको भीतरी बवासीर है तो डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षण कर सकते हैं:

  • एनोस्कोपी: गुदा और मलाशय के अंदर देखने के लिए, आपका डॉक्टर गुदा के अंदर एक पतली रोशनी वाली ट्यूब ‘एनोस्कोप’ डालेगा।
  • सिग्मोइडोस्कोपी: आपके सिग्मॉइड के अंदर देखने के लिए, डॉक्टर सिग्मोइडोस्कोप नामक एक उपकरण डालेगा। इस प्रक्रिया के दो तरीके हैं, फ्लेक्सिबल सिग्मोइडोस्कोपी, और रिजिड सिग्मोइडोस्कोपी। रिजिड सिग्मोइडोस्कोपी को प्रोक्टोस्कोपी भी कहा जाता है।
  • डिजिटल रेक्टल परीक्षा: नसों के आकार और सूजन को महसूस करने के लिए आपका डॉक्टर आपके गुदा के अंदर एक चिकनाई युक्त उंगली डाल सकता है।

आपका डॉक्टर कोलोनोस्कोपी कर सकता है, यदि:

  • आपके लक्षण बताते हैं कि आपको कोलोरेक्टल कैंसर है।
  • कोई अन्य पाचन रोग का संकेत मिलने पर।

कोलोनोस्कोपी का उपयोग पूरे कोलन की जांच के लिए किया जाता है। अन्य परीक्षण प्रक्रियाओं में संज्ञाहरण की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन कोलोनोस्कोपी में होती है।

बवासीर का ऑपरेशन कैसे होता है?

निदान के बाद पता लग जाता है कि आपको किस ग्रेड का बवासीर है। ग्रेड के मुताबिक़ डॉक्टर किसी एक विशिष्ट सर्जरी का सुझाव देता है।

आपके लिए किस प्रकार की सर्जरी उपयुक्त होगी, यह बवासीर के आकार और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। प्रत्येक सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल प्रक्रियाओं के अपने फायदे और नुकसान होते हैं, इसलिए बुद्धिमानी से सही चुनाव करना चाहिए।

लेजर सर्जरी

बवासीर का लेजर ऑपरेशन में लेजर बीम की मदद से मस्सों को सुखाया या जलाया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिकतम एक घंटा का समय लगता है और रोगी उसी दिन घर जा पाने में सक्षम होता है।

बवासीर के लिए उपलब्ध लेजर उपचार के प्रकार हैं:

  • हेमोराहाइडल लेजर प्रोसीजर (HLP): यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जिसे बिना किसी एनेस्थीसिया के किया जाता है। इस प्रक्रिया में सर्जन एक डॉपलर की मदद से रेक्टल धमनियों के टर्मिनल ब्रांच की पहचान करता है और फिर लेजर डायोड फाइबर की मदद से उन ब्रांचेस का फोटो-कोगुलेशन किया जाता है।
  • लेजर हेमोराहाइडोप्लास्टी (LHP): इस प्रक्रिया में भी लेजर कोगुलेशन की मदद से बवासीर में हो रहे रक्त प्रवाह को रोका जाता है।
  • लेजर हेमोराहाइडेक्टोमी: इस ऑपरेशन के दौरान सर्जन बवासीर पर लेजर किरणों को केन्द्रित करता है, जो मस्सों को जलाकर सिकोड़ देती है। इस प्रक्रिया को बड़ी सावधानी से करना होता है ताकि आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान न हो। यह बवासीर को ठीक करने की सबसे आसान और सुरक्षित सर्जिकल प्रक्रिया है।

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हेमोराहाइडेक्टोमी

आंतरिक या बाहरी बवासीर को सर्जिकल प्रक्रियाओं द्वारा हटाना ही हेमोराहाइडेक्टोमी कहलाता है। ऑपरेशन को आमतौर पर जनरल एनेस्थीसिया के प्रभाव में किया जाता है। गंभीर बवासीर का इलाज के लिए यह सबसे अच्छी और प्रभावी प्रक्रिया मानी जाती है।

हेमोराहाइडेक्टोमी दो प्रकार की होती है:

  • क्लोज्ड हेमोराहाइडेक्टोमी: आंतरिक बवासीर को ठीक करने के लिए अधिकतर क्लोज्ड हेमोराहाइडेक्टोमी की जाती है। इस तरीके में पाइल्स को किसी धारदार उपकरण या लेजर द्वारा काटा जाता है और फिर घाव को सिल दिया जाता है।

क्लोज्ड हेमोराहाइडेक्टोमी में पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द अधिक होता है लेकिन यह भविष्य में बवासीर की पुनरावृत्ति की संभावना को बहुत कम कर देता है।

  • ओपन हेमोराहाइडेक्टोमी: ओपन हेमोराहाइडेक्टोमी में इलाज के बाद घाव को खुला छोड़ दिया जाता है। इसमें घाव को सिला नहीं जाता जो टाँके से संबंधित जटिलताओं को कम करता है। लेकिन इसका एक बड़ा नुकसान है कि खुले घावों को ठीक होने में अधिक समय लगता है।

रबर बैंड लिगेशन

इस प्रक्रिया का उपयोग दूसरी ग्रेड का बवासीर और तीसरी ग्रेड के शुरूआती बवासीर का इलाज करने के लिए किया जाता है। रबर बैंड लिगेशन, जिसे बैंडिंग भी कहते हैं, में एक गुदा रोग डॉक्टर बवासीर के आधार के चारो ओर एक छोटा रबर बैंड लगाता है। बैंडिंग हो जाने के बाद मस्से में रक्त का प्रवाह नहीं होता और यह सिकुड़ने लगता है।

लगभग एक हफ्ता के भीतर बवासीर का मस्सा सूखकर गिर जाता है और मल त्याग के दौरान बैंड के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है।

अध्ययन बताते हैं कि ग्रेड 2 की बवासीर के लिए रबर बैंड लिगेशन की प्रक्रिया हमेशा फायदेमंद रही है। आपको पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द बहुत कम होता है और जल्द ही काम में लौटने को सक्षम हो जाते हैं।

इस प्रक्रिया के दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • दर्द
  • थ्रोमबोसिस
  • ब्लीडिंग
  • फोड़ा
  • कुछ लोगों में प्रक्रिया के कुछ दिन बाद बवासीर फिर से बढ़ जाती है।

रबर बैंड लिगेशन की प्रक्रिया लगभग डेढ़ से दो महीने चलती है जिसमें आपको 2-3 बार बैंडिंग कराना होता है। यह दर्दनाक नहीं है लेकिन आप गुदा क्षेत्र में दबाव और असहजता महसूस करेंगे।

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स्टैपलिंग

यह बवासीर का सबसे नवीनतम इलाज है। यह एक सर्जरी है जो आमतौर पर ग्रेड-3 की बवासीर में उपयोगी होती है। इसे जनरल, लोकल या रीजनल एनेस्थीसिया देकर कर सकते हैं।

इस प्रक्रिया में सर्जन सबसे पहले बढ़े हुए बवासीर के मस्सों को काटकर हटा देता है। शेष बचे टिश्यू को गुदा नहर की परत में स्टेपल कर दिया जाता है।

जिन लोगों में स्टैपलिंग प्रक्रिया की जाती है, उन्हें हेमोराहाइडेक्टोमी वाले लोगों में मुकाबले कम दर्द सहन करना पड़ता है। ब्लीडिंग और खुजली सामान्यतः बराबर ही होती है। रिकवरी सरल और आसान होती है लेकिन प्रक्रिया के कुछ ही दिनों बाद बवासीर पुनः बढ़ सकती है। पुनरावृत्ति के बाद हो सकता है कि मस्से पहले से अधिक बार गुदा के बाहर निकलें।

स्क्लेरोथेरेपी

स्क्लेरोथेरेपी कोई सर्जिकल प्रक्रिया नहीं है इसलिए एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती है। इसमें इंजेक्शन की मदद से बवासीर के मस्सों को सुखाया जाता है।

सबसे प्रथम रोगी के गुदा के भीतर प्रोक्टोस्कोप डाला जाता है। यह एक पतली ट्यूब है जिससे प्रकाश निकलता है और डॉक्टर गुदा के भीतर देख पाता है। अब स्क्लेरोसेंट को बवासीर के आसपास के क्षेत्र में इंजेक्ट किया जाता है। स्क्लेरोसेंट रक्त प्रवाह को कम कर देता है और मस्से सिकुड़ने लगते हैं।

इस प्रक्रिया को कई बार करने की आवश्यकता पड़ सकती है। आमतौर पर 1-2 सप्ताह के अंतराल में इंजेक्शन दिए जाते हैं। अगली सुबह रोगी रक्तस्त्राव, हल्का दर्द और गुदा में दबाव महसूस करता है। स्क्लेरोथेरेपी के बाद गुदा क्षेत्र में संक्रमण या सूजन जैसी जटिलताएँ नजर आ सकती है। कुछ दुर्लभ मामलों में गुदा के भीतर खून का थक्का बन सकता है जो दर्द देता है।

हेमोराहाइडल आर्टरी लिगेशन

यह प्रक्रिया हेमोराहाइडेक्टोमी और स्टेप्लिंग का एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड प्रोब की मदद से उन रक्त वाहिकाओं का पता लगाया जाता है जो बवासीर को रक्त के आपूर्ति कर रहीं हैं। इसके बाद उन रक्त वाहिकाओं को सिल दिया जाता है। खून न मिल पाने से मस्से सिकुड़ने लगते हैं और अंततः गिर जाते हैं।

हेमोराहाइडल आर्टरी लिगेशन की प्रक्रिया प्रोलैप्स्ड बवासीर की स्थिति में भी की जा सकती है। सर्जरी या अन्य प्रक्रियाओं की तुलना में यह कम पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द और कम जटिलताएं उत्पन्न करती है। मल त्याग के दौरान हल्की ब्लीडिंग हो सकती है जो कुछ दिन में अपने आप ठीक हो जाती है।

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इन्फ्रारेड फोटो-कोगुलेशन

इन्फ्रारेड फोटो-कोगुलेशन एक गैर-संवेदनाहारी प्रक्रिया है जो एनोस्कोप की मदद से की जाती है। इन्फ्रारेड लाइट, हीट, या उच्च ठंड का उपयोग बवासीर को सिकोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया को कोगुलेशन थेरेपी भी कहते हैं।

बवासीर का ऑपरेशन के लिए लेजर सर्जरी का चयन क्यों करें?

बवासीर के इलाज के लिए उपलब्ध सभी सर्जिकल प्रक्रियाएं अच्छी तरह से काम करती हैं और उनके अपने फायदे और नुकसान हैं। लेकिन लेजर सर्जरी सबसे बेहतर है, क्योंकि:

  • ऑपरेशन में बहुत कम समय लगता है, मरीज को कुछ ही घंटों में छुट्टी मिल जाती है।
  • संक्रमण की संभावना कम
  • प्रक्रिया के दौरान और बाद में कम रक्तस्त्राव
  • कोई पोस्ट-ऑपरेटिव दर्द नहीं, या बहुत कम दर्द
  • स्फिंकटर मांसपेशियों को कोई नुकसान नहीं, आंत्र असंयम की समस्या नहीं
  • लक्षणों से तुरंत राहत
  • सामान्य एनेस्थीसिया का उपयोग नहीं किया जाता है इसलिए एनेस्थीसिया से संबंधित जटिलताएं कम होती हैं या नहीं होती हैं।
  • तेज रिकवरी
  • टांके का उपयोग नहीं किया जाता
  • सर्जरी के बाद निशान नहीं बनता है
  • रोगी को अधिक हॉस्पिटल फॉलो-अप की आवश्यकता नहीं होती है।
  • सर्जरी के 2 दिन बाद ही मरीज अपने दैनिक कार्यों को पुनः सकता है।
  • उच्चतम सफलता दर
  • बवासीर की पुनरावृत्ति की बहुत कम संभावना

बवासीर की सर्जरी के बाद देखभाल

बवासीर की सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक गुदा में दर्द महसूस होगा। दर्द को कम करने के लिए डॉक्टर ओवर-द-काउंटर दवाओं की सिफारिश करेंगे। यदि बवासीर का लेजर ऑपरेशन हुआ है तो 2 सप्ताह में पूरी तरह रिकवर हो जाएंगे। ओपन हेमोराहाइडेक्टोमी या स्टेपलिंग प्रक्रिया के बाद रिकवर होने में ज्यादा समय लगता है। लेजर सर्जरी की तुलना में इनके दुष्प्रभाव भी अधिक होते हैं।

आप अपनी रिकवरी को तेज कर सकते हैं:

  • फाइबर युक्त भोजन करके
  • दिन में 8-10 गिलास पानी पीकर
  • मल मुलायम करने वाले पदार्थों का इस्तेमाल करें। इसके उपयोग से मल त्याग के दौरान होने वाले खिंचाव को रोका जा सकेगा।
  • थोड़ा व्यायाम करें
  • दिन में दो से तीन बाद सिट्ज बाथ लें
  • ऐसी गतिविशियों को करने से बचें जिसमें खींचना या भारी वजन उठाना शामिल है।

निष्कर्ष

डॉक्टर आपके बवासीर के ग्रेड के अनुसार सही उपचार का चयन करेंगे। प्रारंभिक चरण में ज्यादातर गैर-सर्जिकल उपचार चुने जाते हैं।

यदि नॉन-सर्जिकल तरीके असफल होते हैं तो ऑपरेशन का विकल्प बचता है। ज्यादातर मामलों में गंभीर जटिलताएं नहीं होती हैं, लेकिन सर्जरी के पश्चात रोगी दर्द और रक्तस्त्राव का अनुभव करता है। यह कई दिनों तक जारी है तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।

ऐसी सर्जिकल प्रक्रियाएं भी मौजूद हैं जो पाइल्स को सिकोड़ती या हटाती हैं, जैसे कि लेजर सर्जरी। यह हॉस्पिटल के बजाय आपके डॉक्टर के क्लीनिक में भी में की जा सकती है। इससे कम जटिलताएं होती हैं और दर्द भी बहुत कम होता है।

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